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19.10.10

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"फिलहाल जांच चल रही है"




लाधु सुबह निकलता और दोपहर होते-होते अपने ऊंट गाड़े से पीने का पानी लेकर अपने छोटे से गाँव पहुंचता था, ये  दिनचर्या थी लाधु की। पिछले साल की घटना है जब लाधु पानी लेकर लौट रहा था तो लाधु ने देखा की कुछ लोग  एक गाडी के पास खड़े हैं।  मंत्री की गाड़ी खराब हो जाने के कारण "पानी मंत्री" से लाधु के मुलाक़ात बिना किसी अपोइंटमेंट के ही हो गयी। अब लाधु कहाँ पहचानने वाला था।

"अरे.......ओ गाड़ी वाले.... जरा इधर आना।" मंत्री जी ने लाधु को पुकारा।  लाधु अपने गाड़े को रोक कर मंत्री की गाड़ी के पास पहुंचा तो मंत्री जी ने गाड़ी का शीशा थोड़ा सा उतार कर कहा "क्यों....कहाँ जा रहे हो?...सुना है तुम्हारे इलाके में गांझे की तस्करी बड़ी हो रही है....क्या भरा है तुम्हारे मटकों में.......?"

"कुछ नहीं साहब.....इसमें तो बस पीने का पानी है....पास वाले कस्बे से रोज लाना पड़ता है।" लाधु ने डरते-डरते जवाब दिया।

"अरे क्या कहा तुमने?........तुम्हारे गाँव में पानी कब से नहीं आ रहा है?....मुझे बताओ मैं "पानी मंत्री" हूँ।" मंत्री जी ने गाड़ी से नीचे उतरकर कहा।

"साहब पानी को आता तो किसी ने नहीं देखा है, इसे तो लाना पड़ता है।" लाधु ने कहा।

"हूँ....क्या तुम्हारे गाँव में पानी की कोई टंकी नहीं है?" पानी मंत्री जी ने पूछा।

"नहीं साहब......टंकी तो बिलकुल भी नहीं है और उसे भी किसी ने आते नहीं देखा।" लाधु ने जवाब दिया।

"बिजली है क्या तुम्हारे गाँव में या फिर वो भी नहीं है.....।"  पानी मंत्री जी ने झल्ला कर पूछा।

"नहीं साहब बिजली की तो पिछले साल ही शादी हो गयी है...अब वो यहाँ नहीं रहती है....उसका बाप यहीं रहता है साहब।" लाधु ने भोलेपन से जवाब दिया।

"अच्छा.....अच्छा....ठीक है ......एक काम करो....वहाँ आगे जो आदमी खड़ा है.....हाँ वही जिसने काला चश्मा पहन रखा है......उसको तुम्हारी समस्या लिखवा दो.....और मैं जल्दी ही कुछ करता हूँ।"

अपनी समस्या लिखवाकर, लाधु पूरे रास्ते ये ही सोचता गया की जल्दी ही अब उसके गाँव में भी पानी आने लगेगा....टंकी भी आएगी।

गाँव पहुँचकर लाधु ने पूरे गाँव में खबर फैला दी की वो "पानी मंत्री" से मिलकर आया है और जल्द ही उनके गाँव में भी पानी और टंकी आएंगी, मगर गाँव वाले कहाँ मानने वाले थे, उनका कहना था की जब पिछले साल भी टंकी नहीं आई तो अब इस साल भी आने से रही।

काफी दिन बीतने के बाद लाधु ने भी आस छोड़ दी की कोई टंकी आने वाली भी है। एक दिन अचानक ही लाधु ने अपनी झौपडी से देखा की उनके गाँव में एक गाड़ी आई है। लाधु भाग कर वहाँ पहुंचा तो देखा की काले चश्मे वाले उसे ही ढूंढ रहे थे।

"साहब.....ये ही है लाधु......क्या किया इसने?" गाँव वालों ने लाधु की ओर इशारा करके कहा।

"आओ लाधु......आओ, तुमने हमें नहीं पहचाना.....माई सेल्फ टंकी मंत्री.......अरे भाई हम "टंकी मंत्री" हूँ......मुझे पानी मंत्री ने भेजा है।"  टंकी मंत्री ने लपक कर कहा।

टंकी मंत्री की बात सुनकर लाधु के जान में जान आयी।  "कल से तुम्हारे गाँव में एक पानी की टंकी का काम शुरू होगा....और जल्द ही यहाँ भी एक टंकी होगी..., हर घर में एक घड़ा होगा और मजे की बात होगी की वो घड़ा पानी से होगा भरा......ये सब होगा हमारी गवर्नमेंट से................ ये वादा है मेरा।"  टंकी मंत्री ने कहा।

टंकी मंत्री के जाते ही पूरे गाँव में खुशी की लहर दौड़ गयी। लाधु की खुशी का भी ठिकाना न थ, आखिर सबने माना तो सही की वो सच कह रहा था।

छह महीनों  में ही टंकी बन गयी। गाँव वाले भी हैरान थे की इतनी जल्दी टंकी बन कैसे गयी। विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथों हाथ लिया। एंटी कर्पशन की जांच बैठा दी गयी। पानी मंत्री और टंकी मंत्री को घटिया निर्माण के आरोप के चलते इस्तीफा देना पड़ा।

टंकी का उदघाटन नहीं हो सका। नए बने टंकी मंत्री ने कहा की इसका उदघाटन हम करेंगे, इस पर पुराने टंकी मंत्री ने हाई कोर्ट में मामला दर्ज करवा दिया की ये तो उसके खून पसीने की कमाई है, इसका उदघाटन कोई दूसरा नहीं कर सकता, इस पर तो उनका ही हक बनता है। कोर्ट ने फैसला आने तक उदघाटन पर रोक लगा दी।

उधर टंकी के नीचे रहने वाले परिवार खौफ जदा हो गए की टंकी गिरने वाली है। आस पास के लोगों ने अपनी झौपड़ियाँ दूसरी जगह बना ली लेकिन लाधु को पक्का यकीन था की एक दिन इस टंकी का उदघाटन होगा और जरूर होगा, सभी लोगों को पानी मिलेगा। इसी कारण लाधु ने अपनी झौपड़ी को टंकी के नीचे से नहीं हटाई।

होनी को कौन टाल सकता है। एक दिन ज़ोर से आँधी आई, टंकी ताश के पत्तों के भांति भरभरा कर गिर पड़ी। सुबह लाधु की लाश को टंकी के नीचे से निकाला गया।

सरकार ने तुरंत ही जांच कमेटी गठित कर दी। जांच कमेटी ने प्रैस को बताया की वो निम्न बिन्दुओ पर गहराई से विचार कर रही है-

-यह कि लाधु रात को टंकी के पास क्या कर रहा था ?
-यह कि लाधु का जीवन वृत संदेह के घेरे में जान पड़ता है।
-यह कि कहीं लाधु, जो की पूर्व के टंकी मंत्री का दोस्त था, ने ही तो टंकी नहीं गिराई।
-यह कि यदि लाधु ने टंकी नहीं गिराई तो जब दूसरे गाँव वालों ने टंकी के आस पास से अपनी झौपड़ियाँ हटा ली तो उसने अपनी झौपड़ी क्यों नहीं हटाई?

टंकी को गिरे और लाधु को मरे एक साल बीत चुका है, लेकिन जांच कमेटी का फैसला अभी तक नहीं आया है क्यों की "फिलहाल जांच चल रही है"

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मेरे बारे में...
रहने वाला : सीकर, राजस्थान, काम..बाबूगिरी.....बातें लिखता हूँ दिल की....ब्लॉग हैं कहानी घर और अरविन्द जांगिड कुछ ब्लॉग डिजाईन का काम आता है Mast Tips और Mast Blog Tips आप मुझसे यहाँ भी मिल सकते हैं Facebook या Twitter . कुछ और

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1 Comments
1 टिप्पणियां:
  1. बड़ी सच्ची तस्वीर खींच दी आपने अरविन्द जी ,यहाँ की कार्यप्रणाली की
    मेरी शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं

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