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2.2.11

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सुना साहब आपने




आज ट्राफिक कांस्टेबल हवा सिंह और इंस्पेक्टर चैन सिंह सुबह से ही बेचैन थे। दोपहर ढलने को आई थी लेकिन कमाई एक धेले की भी नहीं हुई। जिस गाड़ी को भी उन्होने रोका उनमे से कुछ नेताओं के जानकार निकले और कुछ बड़े अधिकारियों के, सो बैरंग ही छोडनी पड़ी।

आखिरकार हवा सिंह की नजर लाधु पर पड़ी जो अपनी गधा गाड़ी पर पैसे गिनता उन्ही की ओर आ रहा था। हवा सिंह ने हाथ से इशारा कर लाधू को रोकते हुये कहा  "गाड़ी को सड़क के किनारे लगा कर गाड़ी के कागज दिखाओ।"

लाधू ने गधा गाड़ी को सड़क किनारे लगा कर कहा " साहब गधे गाड़ी के कौनसे कागज होते हैं !  मैंने तो सुने ही पहली बार हैं ?"

लाधू का जवाब सुन हवा सिंह के चेहरे पर ऐसी चमक आ गयी मानो किसी गिद्ध ने मरा जानवर देख लिया हो।

"सुना साहब आपने..........जनाब तो ये भी नहीं जानते हैं की गाड़ी के कागज होते  कैसे  हैं।" हवा सिंह ने इंस्पेक्टर साहब की ओर मुस्कुराते हुये कहा।

"क्या कहा....एक भी कागज नहीं हैं, बगैर किसी कागज के वाहन को हाइवे पर तेज गति से दौड़ा रहा है ये दुष्ट !........इसका तो पक्का चालान कटेगा और इसकी गाड़ी कोर्ट से ही छूटेगी।"     इंस्पेक्टर चैन सिंह ने खोपड़ी खुजाते हुये कहा।

"साहब मेरे तो पुरखे गधा गाड़ी चलाते चलाते गधे के साथ सड़क पर ही मर गए, कागज तो किसी के पास भी नहीं थे, होते तो मरते वक़्त मुझे जरूर देकर जाते....और साहब मुझे किसी ने इसके बारे में बताया भी नहीं वरना मैं कागज पूरे रखता।" लाधू ने भोलेपन से कहा।

"देखो भईया गाड़ी के कागज और लुगाई का शृंगार कभी पूरा नहीं होता.......... तो तू कैसे पूरे कागज रखता ? ...............एक तो तुम्हारे पास कोई कागज नहीं है, ऊपर से जबान भी लड़ाते हो..........डबल मिस्टेक !..............भईया काहे को इन कोर्ट कचहरी के चक्कर में पड़ते हो तुम ठहरे धंधे वाले आदमी सौ दौ सौ ले देकर मामला रफा दफा करो......।" हवा सिंह ने लाधू को समझाते हुये कहा।

"मगर साहब मेरे पास तो ये पचास रुपए ही हैं.........अगर ये भी आपको दे दिये तो आज मेरे घर वाले खाएँगे क्या.......मेरा गधा भी भूखा रह जायेगा?"

चल पचास ही दे दे.........जल्दी निकाल वरना बड़े साहब को गुस्सा आ जाएगा तो बात मेरे हाथ से निकली समझ .......और सनद रहे की फिर कभी वाहन को हाइवे पर तेज गति से मत दौडाना, इससे आम जनता की जान माल का भारी खतरा है........लाला ! दुबारा ऐसी संदिग्ध परिस्थितियों में दिखा तो अबकी बार सीधा अंदर जाएगा....समझा।"  हवा सिंह ने लाधू की जेब पर झपट्टा मारकर पचास रुपए अपनी जेब में रखते हुये कहा।

पचास रुपए हवा सिंह को चुकता कर लाधू  गधा गाड़ी को घर की तरफ ले जाते समय सोच रहा था की जाने वो कौनसे कागज थे जो उसके दद्दू ने उसे मरते वक़्त नहीं दिये थे।

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