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पत्ते-पत्ते में किसने फूँकी जान है रे




पत्ते-पत्ते में  किसने  फूँकी जान है रे,
साँसों का खजाना जिसके हाथ है रे। 

करने लगा मनमानी जग में आकर,
भूला की होना एक दिन हिसाब है रे। 

किसको ढूँढता हैं मंदिर मस्जिद में,
कण  कण में  उसका तो वास है रे। 

नेकी के  सिवाय क्या है साथ जाना,
किस  पर तुझको यूं अभिमान है रे। 

हरी को सुमर ले जब तक साथ शरीर,
होना है बेबस बुढ़ापा उसका नाम है रे। 

दूसरों को रुला जो हँसकर है जी रहा,
जीना  उसका  भी यहाँ धिक्कार है रे। 

तू  भूखों को  खिला, तू रोतों को हँसा,
इससे बढ़कर क्या धर्म का काम है रे। 

भगवान  को भी  आना पड़ता है वहाँ,
इंसान का इंसान से जहां प्यार है रे। 

क्यों आज तू "सच" जो बोल नहीं पाता,
बरसों से इस आत्मा पर बहुत बोझ है रे।

◘◘◘



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मेरे बारे में...
रहने वाला : सीकर, राजस्थान, काम..बाबूगिरी.....बातें लिखता हूँ दिल की....ब्लॉग हैं कहानी घर और अरविन्द जांगिड कुछ ब्लॉग डिजाईन का काम आता है Mast Tips और Mast Blog Tips आप मुझसे यहाँ भी मिल सकते हैं Facebook या Twitter . कुछ और

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Comments
15 Comments
15 टिप्पणियां:
  1. इस रचना के द्वारा आपने अच्छी सीख दी है। आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सत्य वचन !!
    आज की सच्चाई को उकेरा है आपने.
    हार्दिक शुभ कामनाएं आपको !!

    उत्तर देंहटाएं
  3. सत्य वचन !!
    आज की सच्चाई को उकेरा है आपने.
    हार्दिक शुभ कामनाएं आपको !!

    उत्तर देंहटाएं
  4. सत्य वचन !!
    आज की सच्चाई को उकेरा है आपने.
    हार्दिक शुभ कामनाएं आपको !!

    उत्तर देंहटाएं
  5. यही सब सोच लें तो दुनियां स्वर्ग हो जाए...बहुत सार्थक सोच और उसकी सुन्दर अभिव्यक्ति..

    उत्तर देंहटाएं
  6. तू भूखों को खिला, तू रोतों को हँसा,
    इससे बढ़कर क्या धर्म का काम है रे।


    भगवान को भी आना पड़ता है वहाँ,
    इंसान का इंसान से जहां प्यार है रे।

    सुंदर ... अर्थपूर्ण पावन विचार लिए पंक्तियाँ

    उत्तर देंहटाएं
  7. जो कण कण में है , उसे लोग ढूंढते हैं और उसके होने का प्रमाण मांगते हैं । अजीब है मानसिकता । बहुत अच्छी लगी आपकी यह रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  8. सार्थक संदेश देती रचना ! सचमुच नेकी के सिवा कुछ भी पाने योग्य नहीं है !

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत अच्छी लगी आपकी यह रचना।
    एक और सुन्दर कविता आपकी कलम से !

    उत्तर देंहटाएं
  10. जन्मदाता के प्रति जवाबदेही और मानवता को समर्पित अच्छे भाव....

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर लिखा है .सटीक ..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  12. किसको ढूँढता हैं मंदिर मस्जिद में,
    कण कण में उसका तो वास है रे।

    सार्थक संदेश देती हुई सुंदर रचना।

    उत्तर देंहटाएं

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