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आज आईने में खुद को न देख





आज आईने में  खुद को न देख,
जिंदगी को आईने से भी न देख।

रहने  दे उसको वक्त में ही छिपा,
बेवजह परदों को हटाकर न देख।

वही  कुछ चेहरे हैं जाने पहचाने,
इनको यूँ आजमाकर तो न देख।

है  फासला कितना तेरा मुझसे,
परछाइयों  को मिटाकर न देख।


क्या खो गया था तेरा उस शहर में,
हाथों की लकीरों पर निशां न देख।

अब भी टूटे दिल में है कोई रहता,
दिल के टुकड़ों  में ढूंढकर  न देख।

"सच" ये जिंदगी भी है जाने कैसी,
हैं जो कुछ भरम तोड़कर न देख।

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मेरे बारे में...
रहने वाला : सीकर, राजस्थान, काम..बाबूगिरी.....बातें लिखता हूँ दिल की....ब्लॉग हैं कहानी घर और अरविन्द जांगिड कुछ ब्लॉग डिजाईन का काम आता है Mast Tips और Mast Blog Tips आप मुझसे यहाँ भी मिल सकते हैं Facebook या Twitter . कुछ और

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Comments
13 Comments
13 टिप्पणियां:
  1. "सच" ये जिंदगी भी है जाने कैसी,
    हैं जो कुछ भरम तोड़कर न देख।
    .....बेहतरीन गजल हर शेर दिल को छू लेता है....अरविंद भाई|

    उत्तर देंहटाएं
  2. वही कुछ चेहरे हैं जाने पहचाने,
    इनको यूँ आजमाकर तो न देख।
    .......वाह......क्या बात कह दी !!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. लाजबाब गज़ल. सुंदर अभिव्यक्ति.

    उत्तर देंहटाएं
  4. अरविन्द जी, नमस्कार, आप बहुत अच्छा लिखते हैं ...
    एक सुझाव है अन्यथा न लीजियेगा ... जब कोई ग़ज़ल लिखना चाहता है तो अक्सर उसके नियमों से अनभिज्ञ रहता है ... पहले मैं भी नियमों का पालन न करके ही ग़ज़ल नुमा रचनाएँ लिखते रहता था ... फिर ब्लॉग जगत के ही कुछ गुणीजनो से संपर्क हुआ और उनसे ग़ज़ल के नियमों के बारे में काफी कुछ जानने का मौका मिला ... मेरा आपसे निवेदन है कि आपभी अपनी जानकारी बढ़ाने की कोशिश करें ... मुझे यकीन है कि आप अपनी रचनाओं को और बेहतर बना सकते हैं ... मेरी तरफ से आपको हार्दिक शुभकामनायें ...
    मैं खुदको कोई बहुत बड़ा जानकार नहीं मानता हूँ ... थोडा बहुत लिखता हूँ और हमेशा सीखने की कोशिश करते रहता हूँ ... आजकल समय नहीं मिल रहा है ग़ज़ल लिखने का ... उम्मीद है भविष्य में फिर समय मिलेगा ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. @Indranil Bhattacharjee ........."सैल"__आपका बहुत बहुत आभार जो आपने मेरा ध्यान मेरी कमियों की और खीचा. मैं कोशिश करूँगा और ज्यादा सीखने की और त्रुटियों को दूर करने की...आपका पुनः तहे दिल से आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  6. वही कुछ चेहरे हैं जाने पहचाने,
    इनको यूँ आजमाकर तो न देख।
    काफिया क्या है रदीफ़ क्या होता है ,मैं नहीं जानता ,
    भाव सब पहचानता .अच्छी रचना ,मानता ,लिखा तेरा पहचानता .

    उत्तर देंहटाएं
  7. @ अरविन्द जी,
    मैं आपकी कमियां नहीं गिना रहा था महोदय ... इतनी औकात नहीं है ... बस एक सुझाव था ...
    वैसे आपकी लघु कथाएं ज़बरदस्त है ... इस विधा में आप महारथी हो ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. @Indranil Bhattacharjee ........."सैलजी .....आपके मार्गदर्शन के लिए मैं आपका आभारी रहूँगा, मैं आशा करता हूँ की आप व्यस्त दिनचर्या से कुछ वक्त निकालकर ब्लॉग पर पधारते रहेंगे.

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  9. बहुत सुन्दर भाव एवं शब्द संयोजन ....लाजबाब .. !

    उत्तर देंहटाएं

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