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श्रदेय बाबा राम देव



श्रदेय बाबा राम देव

बाबा रामदेव जिनको "योग गुरु" के नाम ज्यादा जाना जाता है, ने भारत के प्राचीन योग को न केवल भारत में वरन सम्पूर्ण विश्व में फैला दिया है। वर्तमान समय में भारत में शायद ही ऐसा कोई हो जो बाबा रामदेव को नहीं जनता हो,  ऐसी अटूट श्रधा है हमारी बाबा के प्रति। बाबा के अलौकिक तेज का कारण है उनकी निश्चलता, निस्वार्थ भाव जो देश के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित है। जिन विदेशी कंपनियों को उनके ही देश ने बाहर का रास्ता दिखा दिया, वे भारत में आकर अपनी दवाओं के कारखाने लगा रहे है, बाबा इससे बहुत ही आहत हैं एवं इसका विरोध करने से कभी चूकते भी नहीं। हमें प्रकृति और योग से उपचार बाबा ने याद दिलाया है जो हमारे लिए कोई नया नहीं है, जैसा की बाबा बतातें है की ये तो हमारे देश की सदियों पुरानी विरासत है, जिसे पाश्चात्य संस्कृति के भुलावे में आकर हमने बिसरा दिया है। धन्य है भारत माता बाबा को पाकर। बाबा के बारे में जाने तो इनके बचपन का नाम रामकिशन यादव था. इनका जन्म हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के अलीपुर गांव में हुआ था। आठवी कक्षा तक बाबा नें एक स्कूल जो की शहजादपुर में थी, अध्यन के उपरांत कानपुर में "वैदिक आश्रम" में प्रवेश लिया। यहाँ बाबा ने संस्कृत, प्राचीन ग्रंथों के साथ साथ योग का भी गहनता से अध्यन किया। कानपुर में अध्यन के उपरांत बाबा ने सन्यास ले लिया और हिमालय की गोदी में आ गए। यही से उन्हें रामदेव का नाम भी मिला। हिमालय से आने के बाद बाबा ने हरिद्वार को अपना आशीर्वाद दिया और अपनी कर्म भूमि बनाया जो आज भी जारी है। बाबा ने यहाँ "दिव्य योग ट्रस्ट" का गठन किया। बाबा यहाँ रहकर पुरे विश्व में भारतीय योग का प्रचार प्रसार में जुटे हुए हैं। बाबा के समाज सेवा एवं योग संबधी उल्लेखनीय कार्यों के हेतु जनवरी २००७ में के आई आई यूनिवर्सिटी द्वारा डोक्टोरेट की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। बाबा की सोच पुरानी सभी मान्यताओ से भिन्न है। बाबा चाहते है की भारत जिस देश में भरपूर सामर्थ्य है, वह सोच से भी दरिद्र नहीं होना चाहिए। बाबा के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर का निवास होता है, लेकिन ईश्वर की पूजा से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है मानव के प्रति दोषमुक्त द्रष्टिकोण एंव निस्वार्थ सेवा भाव। पतंजली योगपीठ का गठन कर बाबा ने आयुर्वेद से निर्मित दवाओं की और फिर से ध्यान आकृषित करवाया है। बाबा को न केवल देश में वरन विदेशों में टीवी के द्वारा सुबह-सुबह ही देखा जा सकता है। एक बात जो बाबा को दूसरों से अलग करती है वो है उनका "देशप्रेम". बाबा ने देश के प्रति समर्पित युवाओ को राजनीती में लाने का फैसला भी किया है। बाबा का उद्देश्य स्वंय राजनीति में कोई पद पाना नहीं है वरन वर्तमान राजनीति को साफ सुथरा बनाना है। भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति ही बाबा का सपना है। बाबा के अनुसार वर्तमान में कोई भी पार्टी भ्रष्टाचार मुक्त नहीं है इसलिए वे स्वंय का राजनीतिक दल बनाएंगे। ईश्वर से कामना है की बाबा अपने कार्य में सफल हों।

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2 Comments
2 टिप्पणियां:
  1. प्रशंसनीय यत्न
    हजारों वर्ष से जिन आस्थाओं की नींव पर हमारा देश अडिग है, क्या धर्माधता का कोई भूकंप उसे डिगा पाएगा? हजारों आक्रमणों के बाद भी जिस देश की आत्मा पर आंच नहीं आई, क्या उसकी आंखों में उन्माद का धुआं भरने के लिए आप अपने ही घर में आग लगा लेंगे? क्या हम उस वहशीपन का शिकार होना चाहते हैं जो दूसरों की हत्या करना, दूसरों की नारियों की अस्मत लूटना, दूसरों के धर्मग्रंथ जलाना और दूसरों के भगवान को खंडित करना अपने धर्म की सेवा मानता है? हमारी भूमि ने चार विश्व धर्मो को जन्म दिया। हमारे देश में जो भी आया, हमने उसे गले लगाया। हमारा देश सद्भाव का, सहधर्मिता का, सबको अपना मानने वाला देश है। हमारे ऋषियों ने हमें यही तो दिशा दिखाई थी। उन्होंने स्वामी दयानन्द सरस्वती के मत का मण्डन करते हुए मूर्तिपूजा,श्राद्ध, अवतार, वर्ण व्यवस्था आदि सनातन धर्म का खण्डन किया।

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