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15.11.10

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कभी जब....





कभी जब,
तुम भुलाना चाहो किसी अपने को,
तुम्हें मेरी याद तो आती होगी


कभी जब,
वक़्त छोडने लगे साथ तुम्हारा,
तुम्हें मेरी याद तो आती होगी,

कभी जब,
हवा में उड़ते सूखे पत्ते देख,
तुम्हें मेरी याद तो आती होगी

कभी जब,
यादें टकराती होंगी दिल से तेरे,
तुम्हें मेरी याद तो आती होगी

कभी जब,
कतार से पीछे छूटे किसी परिंदे को देख
तुम्हे मेरी याद तो आती होगी


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मेरे बारे में...
रहने वाला : सीकर, राजस्थान, काम..बाबूगिरी.....बातें लिखता हूँ दिल की....ब्लॉग हैं कहानी घर और अरविन्द जांगिड कुछ ब्लॉग डिजाईन का काम आता है Mast Tips और Mast Blog Tips आप मुझसे यहाँ भी मिल सकते हैं Facebook या Twitter . कुछ और

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Comments
4 Comments
4 टिप्पणियां:
  1. तुम्हे मेरी याद तो आती होगी
    अतिसुन्दर....हृदयाष्पर्शक

    उत्तर देंहटाएं
  2. अपनों की याद कब भूलती है। दूर रहें बेशक याद तो आती होगी। शुभकामनायें। उमदा रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  3. ek yaad hi to hai jo zindgi me jine ka sahara banti hai. sunder abhivyakti.

    उत्तर देंहटाएं
  4. कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।

    उत्तर देंहटाएं

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