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लगता है जो खामोश बरसों से, ये आदमी है





लगता है जो खामोश बरसों से, ये आदमी है,
एक अदद जीने को, रोज मरता है यहाँ।

दादा झूठी सुनाई तूने, सच की विजयी कहानी,
देख तेरा सच तो अब, सरे आम हारता है यहाँ।

बापू, उसूलों को वक्त कि जंग खा रही एक अरसे से,
ताक पर रखें हैं बचे कुछ उसूल तेरे, गर्त खाते हैं यहाँ। 

खामोशी से गूंगे बन चुके हैं, आदमी के वीरान चेहरे, 
खामोश जबानों पर भी, लगता है पहरा यहाँ। 

चौराहे पर इमानदारी बिक रही थी, बेईमानों के हाथों,
"सच" भी अब "ईमानदार" कहने से कतराता है यहाँ। 

कभी वक़्त मिले तो इस मूरत से बाहर झाँक,
तुझे, तेरा इजादी आदमी, बीच बाजार बेचता है यहाँ। 

हमने माना कि सच का दामन काँटों से उलझा है,
सच का दिया मन में जला, कोई मुस्कुराता हुआ, चला आता है यहाँ

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मेरे बारे में...
रहने वाला : सीकर, राजस्थान, काम..बाबूगिरी.....बातें लिखता हूँ दिल की....ब्लॉग हैं कहानी घर और अरविन्द जांगिड कुछ ब्लॉग डिजाईन का काम आता है Mast Tips और Mast Blog Tips आप मुझसे यहाँ भी मिल सकते हैं Facebook या Twitter . कुछ और

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Comments
14 Comments
14 टिप्पणियां:
  1. सच कहूँ तो मुझे तुमसे डर लगता है

    उसे इक्र्रार ए वफ़ा का नाम दो ...
    vatvriksh ke liye apni ye rachnayen bhejen rasprabha@gmail.com per parichay tasweer aur blog link ke saath

    उत्तर देंहटाएं
  2. आज के आदमी का सच उतार दिया।

    उत्तर देंहटाएं
  3. कविता के माध्यम से बहुत कुछ कह गए ......अरविन्द जी..

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी कविता है .......
    आज के आदमी का सच उतार दिया.....
    कविता के माध्यम से बहुत कुछ कह गए ......
    अरविन्द जी..

    उत्तर देंहटाएं
  5. आज के सन्दर्भों को बखूबी सामने ला दिया आपने इस रचना के माध्यम से ...बहुत आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. अरविन्द जी धन्यवाद। अब जब आपने बताया तो मेरा दिल भी शान्त नही रह सका। हमारे इंस्टीच्युट में एक ऐसी लड़की पढ़ रही है जिसके पिता का देहान्त हो गया है। उसके परिवार का खर्च वहन उसके चाचा जी करते है। एक दिन वो हमारे पास आई और उसने कहा वो पढ़ना चाहती है लेकिन उसके पास फीस के पैसे देने के लिए नही है। मैने उसकी मॉं से बात करके उसे मुफ्त में पढ़ाना ‘शुरू कर दिया। जहॉं तक सभी इंसानों से होता है निशक्त लोगों की मदद करनी चाहिए।

    उत्तर देंहटाएं
  7. आज के इंसान का नंगा सच। बेहतरीन रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  8. .

    जब बईमानी का बोलबाला होता है तो इमानदार को चुप होना ही पड़ता है। लेकिन फिर भी ऐसे बहुत से दिल हैं जहाँ सच का दिया जल रहा है और सर्वत्र प्रकाश है। आभार इस सुन्दर प्रस्तुति का।

    .

    उत्तर देंहटाएं

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