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"प्राणघातक आत्मा राम का फ्ल्यू"



सुबह की सैर पर जाना गुप्ता जी को बड़ा ही पसंद है। गुप्ता जी की माने तो सुबह का वातावरण शांत होता है। जितनी भी "दुरात्माएँ" होती हैं, उनके उठने से पहले ही सैर कर लेनी चाहिए, उनके जागने के बाद वातावरण में "नेगेटिवे एनर्जी" फैल जाती है। सड़क पर चारों तरफ पसरे खड्डो से बचते बचाते गुप्ता जी बाबू चाय वाले के यहाँ जैसे ही बैठने वाले थे, बाबू ने बड़े ही उतावलेपन  से पूछा -" गुप्ता जी ये अखबार वाले भी रोज डराते रहते हैं, पिछले तीन चार दिनों से एक ही खबर का पूंछडा पकड़ रखा है........  "प्राणघातक आत्मा राम का फ्ल्यू", मेरी तो कुछ समझ भी ना बैठ रहा है, अब आप ही बताइये, आखिर ये है क्या बला......कोई विदेशी बिमारी है क्या ?...... जिस अखबार को उठाओ आत्मा राम ही आत्मा राम निकलता है... ये आत्मा राम हो गया की कोई भूत का जूता ?

"अब तो वापस गाँव जाने का जी करता है, पता नहीं कैसी कैसी विचित्र बीमारियाँ लग रही हैं लोगों को...ये तेरा अखबार भी अब पढ़ने का रहा नहीं....खबरों के बीच में किसी न किसी हीरोइन को घुसेड़ देते हैं.....वो भी आडी तिरछी..... जैसे टेम्पू में कोई कबाड लाद रखा हो........ कोई क्या बेच रही है कोई क्या.......... चल छोड़... ला वो अखबार तो दे....... देखू तो सही क्या छापा है?" गुप्ता जी ने उतावलेपन से जवाब दिया।

 "देश का शेयर बाजार ओंधे मुँह गिर चुका है कारण है देश में इन दिनों एक नयी प्रजाति का "फ़्ल्यू" अपने पैर पसार रहा है। रोज नए नए मरीज अस्पतालों में भर्ती किए जा रहे हैं। अस्पतालों का आलम ये है की ऊपर नीचे जहाँ देखो मरीज ही मरीज दिखाई दे रहे है। यह एक प्रकार का संक्रामक रोग है, जिसकी शुरुआत भी इसी शहर के बाशिंदे आत्मा राम की मौत से हुई थी इसलिए मुख्यमंत्री द्वारा भव्य समारोह में इसे  "आत्मा राम का फ्ल्यू" का नाम दे दिया। देश विदेश के जाने माने डॉक्टर इस फ्ल्यू के बारे में रिसर्च करने में जुट गए हैं। संसद में भी ये ही मुद्दा गरमाया हुआ है और विपक्ष ने इसके लिए सत्तारूढ़ पार्टी की नाकामी और पड़ोसी मुल्क चीन की करतूत बताया और पूरे दिन के लिए वॉक आउट कर गयी। सत्तारूढ़ पार्टी ने इसी मसले पर एक आपातकालीन बैठक का आयोजन किया है,  जिसमें सभी मित्र देशों के राष्ट्रपति, उद्योगपति, रईस लोग हिस्सा ले रहे हैं। उन्होने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया की अब तक खोजे जा चुके फ्ल्यू में आत्मा राम का फ्ल्यू सबसे ज्यादा  जानलेवा और प्राणघातक फ्ल्यू है। बचाव ही इसका इलाज है। स्वास्थय मंत्रालय ने अमेरिका से एक प्रैस नोट जारी कर इसके बारे में विस्तार से बताया है, मसलन इसके लक्षण और बचाव जो इस प्रकार से है-

आत्मा राम के फ्ल्यू से ग्रसित व्यक्ति जो भी देखता है, सुनता है, करता है, उसे साफ साफ और सत्य के साथ बयान कर देता है, वह झूँठ से कोसों दूर भागता है, जो की इसका पहला एंव पुख्ता लक्षण है। ये बीमारी मुख्य रूप से गरीब और मध्यम वर्ग के पढ़े लिखे लोगों को अपना शिकार बनाती है। इस रोग से पीड़ित रोगी समाज के विकास में रुकावट बन जाता है, बोझ बन जाता है। जहाँ भी जाता है, अपनी इसी आदत के कारण किसी भी कार्य को होने नहीं देता क्यों की उसे भ्रस्टाचार की तेज बू आने लगती है जो की "आम आदमी" के लिए घोर जानलेवा सिद्ध होती है, इसका प्रमाण पूर्व के आकड़ों से स्पष्ट ज्ञात किया जा सकता है। पीड़ित व्यक्ति समाज में हिंसा, उपद्रव, आगजनी, अशांति आदि का पूर्ण जिम्मेदार होता है और  विश्व  के सम्पूर्ण सभ्य  समाज के लिए खतरा बन जाता है। देशों अर्थव्यवस्थाओं की गिरावट, शेयर बाजार में मंदी का मूल जनक एंव अन्य कई रोगों का वाहक बन जाता है.  अपनी इसी आदत के कारण उसे जल्दी ही समाज से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है और कुछ ही समय के बात पीड़ित व्यक्ति की रहस्यमय परिस्थितियो में मौत जो जाती है..... लेकिन मरने से पहले वो इस रोग को कई लोगों में फैला चुका होता है।

अतः इसके बचाव के लिए कुछ उपाय सुझाए जा रहे हैं

पीड़ित व्यक्ति जो जितना जल्दी हो सके आम जनता से दूर कर देना चाहिए और अविलंब इसकी सूचना प्रशासन को देनी चाहिए। उसे हर प्रकार के धार्मिक आयोजनों, भक्ति के कार्यकर्मों से दूर रखे। उसके विचारों को महत्व ना दें। उसका बायकाट करें। जहा तक हो सके उसे जलील करें, लालत भेजें, भला बुरा कहें, आवश्यकता पड़ने पर शारीरिक बल का प्रयोग पुलिस की निगरानी में किया जा सकता है।  "शकीरा, बिपाशा..ब्रिटनी स्पियर्स, गोगा.....हिल्टन.....क्लिंटन.......पेरिस......आन्द्रे.....जैसे किसी सभ्य कलाकार के गाने एंव चित्र आदि दिखाएँ। उसके सोने के कमरे में किसी वर्तमान नेता, अभिनेता या किसी आला अधिकारी के चित्र चिपका दें। "

गुप्ता जी ने गहरी सांस भरते हुए कहा "भाई अगर समाज में कहीं कोई कमी है,....कोई भ्रष्टाचार है...... तो उसका विरोध करना गलत तो कतई नहीं कहा जा सकता है। मुझे लगता है की ये सब ड्रामा आम आदमी की आवाज को दबाने का षड्यंत्र है। भ्रष्टाचारी चाहे कोई नेता हो, अधिकारी हो, पुलिस वाला हो.... कोई भी हो है तो "चोर" ही ना....ये कोई जानलेवा फ्ल्यू   वल्यू नहीं है। सब गलत छापा है.... चल बाबू तू तो चाय बना फिर मुझे नहा धोकर बिजली विभाग भी जाना है.... कोई पचासों शिकायतें कर दी होंगी अब तक मैंने .... लेकिन आज तक मेरी खराब पड़ी बिजली ठीक करने कोई नहीं आया विभाग से ....ऊपर से रिश्वत मांगते हैं सो अलग.... आज मैं उनके दफ्तर के सामने ही आमरण अनशन पर बैठ जाऊंगा। जब तक बिजली ठीक नहीं करेंगे उठूँगा नहीं..... बताए देता हूँ। "

गुप्ता जी की बातें सुनकर बाबू चाय वाले का शक अब यकीन में बदलता जा रहा था की गुप्ता जी को भी "आत्मा राम का फ्ल्यू" लग चुका है।

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